ऐतिहासिक उपलब्धि: चंद्रमा की परिक्रमा कर सुरक्षित लौटा आर्टेमिस-II, अब 2028 में चांद पर कदम रखेगी पहली महिला
नई दिल्ली/वॉशिंगटन। मानव अंतरिक्ष इतिहास में आज एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। नासा (NASA) का ऐतिहासिक आर्टेमिस II (Artemis II) मिशन सफलतापूर्वक संपन्न हो गया है। चंद्रमा की 10 दिनों की चुनौतीपूर्ण परिक्रमा पूरी करने के बाद, ओरियन (Orion) कैप्सूल शनिवार सुबह भारतीय समयानुसार 5:10 बजे प्रशांत महासागर में सुरक्षित रूप से उतर गया। सैन डिएगो तट के पास हुए इस 'स्प्लैशडाउन' के साथ ही चारों अंतरिक्ष यात्री धरती पर सकुशल लौट आए हैं।
रफ्तार का नया कीर्तिमान और सुरक्षित वापसी
धरती के वायुमंडल में प्रवेश के दौरान ओरियन की गति 40,000 से 42,000 किमी प्रति घंटा दर्ज की गई, जो इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से लौटने वाले यानों की गति से कहीं अधिक है। इस भीषण रफ्तार और वायुमंडलीय घर्षण से पैदा होने वाली गर्मी व दबाव को झेलने के लिए ओरियन को विशेष रूप से सुदृढ़ बनाया गया था। चालक दल ने पृथ्वी से लगभग 4,06,771 किमी (2,52,756 मील) की दूरी तय की, जो मानव इतिहास में अंतरिक्ष की अब तक की सबसे लंबी यात्रा है।
इन नायकों ने रचा इतिहास
इस मिशन की कमान रीड वाइजमैन के हाथों में थी। उनके साथ पायलट विक्टर ग्लोवर, मिशन स्पेशलिस्ट क्रिस्टीना कोच और कनाडा के अंतरिक्ष यात्री जेरेमी हैनसेन शामिल थे। इन चारों ने न केवल चंद्रमा के रहस्यों को करीब से देखा, बल्कि भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए महत्वपूर्ण डेटा भी एकत्र किया।
लक्ष्य 2028: चांद की सतह पर उतरेंगी पहली महिला
आर्टेमिस II की सफलता ने अब आर्टेमिस III के लिए रास्ता साफ कर दिया है। नासा की योजना के अनुसार, 2028 में दो अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह पर उतारा जाएगा। इस मिशन की सबसे खास बात यह होगी कि पहली बार कोई महिला अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा पर कदम रखकर इतिहास रचेगी।
भविष्य की राह: चंद्रमा पर स्थायी आधार
नासा का यह अभियान केवल चांद तक जाने तक सीमित नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य चंद्रमा पर एक स्थायी मानव आधार (Permanent Human Base) बनाना है। आर्टेमिस II की सफलता यह प्रमाणित करती है कि इंसान अब गहरी अंतरिक्ष यात्राओं (Deep Space Exploration) के लिए पूरी तरह तैयार है, जो भविष्य में मंगल ग्रह तक पहुंचने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।

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