राजधानी में कचरा कलेक्शन हुआ महंगा, 3.60 लाख प्रॉपर्टी मालिकों को देना होगा बढ़ा हुआ यूजर चार्ज

राजधानी में कचरा कलेक्शन हुआ महंगा, 3.60 लाख प्रॉपर्टी मालिकों को देना होगा बढ़ा हुआ यूजर चार्ज
नगर निगम ने लागू किया नया रेट 
रायपुर (चैनल इंडिया)। शहरवासियों को अब डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन सर्विस के लिए अधिक भुगतान करना होगा। रायपुर नगर निगम ने रेजिडेंशियल और कमर्शियल कैटेगरी की प्रॉपर्टी पर लगने वाले यूजर चार्ज में बढ़ोतरी कर दी है। नई दरों का असर शहर की लगभग 3.60 लाख प्रॉपर्टी पर पड़ेगा। निगम प्रशासन ने ऑनलाइन सिस्टम अपडेट कर बढ़ी हुई दरों के अनुसार कलेक्शन भी शुरू कर दिया है।
नई व्यवस्था के तहत रेजिडेंशियल कैटेगरी के उपभोक्ताओं को प्रतिमाह 10 रुपए अतिरिक्त भुगतान करना होगा, जबकि कमर्शियल कैटेगरी में यह बढ़ोतरी 30 रुपए प्रतिमाह की गई है। इसके अनुसार एक हजार वर्गफीट के मकान का सालाना यूजर चार्ज 960 रुपये से बढक़र 1,080 रुपये हो गया है। निजी स्कूल, कॉलेज, होटल, लॉज, अस्पताल, क्लीनिक, दुकान, मैरिज पैलेस समेत अन्य कमर्शियल संस्थानों के लिए भी नए रेट लागू कर दिए गए हैं। निगम का कहना है कि यह बदलाव तय नियमों के अनुसार किया गया है।
नगर निगम सभी उपभोक्ताओं से एक समान यूजर चार्ज नहीं लेता। रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी के लिए शुल्क मकान के आकार के आधार पर तय किया जाता है। वहीं रेस्टोरेंट्स में सीटिंग कैपेसिटी यानी कुर्सियों की संख्या को आधार बनाया जाता है। अस्पतालों के लिए बेड की संख्या और होटल-लॉज के लिए कमरों की संख्या के अनुसार चार्ज निर्धारित किया जाता है। क्लीनिकों में बायो-वेस्ट मैनेजमेंट शुल्क के अलावा अलग से यूजर चार्ज लिया जाता है। निगम के मुताबिक यह सिस्टम कचरा उत्पादन की मात्रा के अनुपात में शुल्क तय करने के उद्देश्य से बनाया गया है।
नई दरों के अनुसार 25 कुर्सियों वाले रेस्टोरेंट का सालाना यूजर चार्ज 3,960 रुपये से बढक़र 4,320 रुपये हो गया है। निजी प्राथमिक स्कूलों के लिए शुल्क 4,200 रुपये से बढक़र 4,800 रुपये कर दिया गया है। वहीं अस्पतालों का सालाना यूजर चार्ज 18 हजार रुपये से बढ़ाकर 26 हजार रुपये कर दिया गया है। रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी के लिए शुल्क मकान के आकार के अनुसार अलग-अलग रहेगा।
चार महीने से भुगतान नहीं सफाई ठेकेदारों की हड़ताल 
शहर की सफाई व्यवस्था पर संकट गहरा गया है। चेतावनी के बाद आज सुबह से सफाई ठेकेदारों ने काम बंद कर हड़ताल पर चले गए हैं। कई महीनों से अटके भुगतान बहाल करने की मांग की जा रही है। अब निगम क्षेत्र के सभी 70 वार्डों में सफाई कार्य ठप हो गया है।  ठेकेदारों का कहना है कि एक माह में सभी वार्डों को मिलाकर चार करोड़ का भुगतान होता है लेकिन पिछले चार माह से भुगतान नहीं हुआ है। अब भुगतान होने तक काम पर वापस नहीं लौटेंगे।