कांकेर में मलेरिया से दस दिन में तीन मौतें : बस्तर में इस साल अब तक 8426 मरीज

कांकेर में मलेरिया से दस दिन में तीन मौतें : बस्तर में इस साल अब तक 8426 मरीज
जगदलपुर/कांकेर (चैनल इंडिया) बस्तर को मलेरिया मुक्त बनाने के लिए अभियान का 14 वां चरण चल रहा है, लेकिन संक्रमण नहीं थम रहा है। इस साल जनवरी से अब तक 8426 लोग मलेरिया से पीडि़त हो चुके हैं। बीते दस दिनों में कांकेर जिले में मलेरिया से तीन लोगों की मौत हो चुकी है।
 
कांकेर जिले के मर्दापोटी बालक आश्रम में पढऩे वाले चौथी कक्षा के छात्र सुभाष कुमेटी (9) की रविवार सुबह इलाज के दौरान मौत हो गई। जिले में दो दिन में मलेरिया से दो बच्चों की जान जा चुकी है। बीते दस दिनों में यह तीसरी मौत है। तीनों मृतक स्कूली बच्चे हैं। मर्दापोटी आश्रम में 22 से 24 जुलाई के बीच हुई स्वास्थ्य जांच में नौ छात्र मलेरिया पॉजिटिव मिले थे। इनमें तामेश्वर भास्कर (7) और विक्रम मंडावी (8) की हालत गंभीर होने पर उन्हें रायपुर रेफर किया गया है। नवीन कुमेटी का इलाज एमसीएच अलबेलापारा में चल रहा है। सुभाष की तबीयत बिगडऩे पर परिजन पहले उसे अस्पताल ले जाने के बजाय गांव में झाड़-फूंक कराने ले गए थे। गंभीर हालत में दोपहर करीब 3:30 बजे उसे अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी। लगातार मौतों के बाद सहायक आयुक्त जया मनु और जिला स्वास्थ्य अधिकारी की टीम आश्रम पहुंची और बच्चों का दोबारा टेस्ट कराया।
दो साल से नहीं बांटी मेडिकेटेड मच्छरदानियां
बस्तर में एक तरफ स्वास्थ्य विभाग कागजों पर ‘मलेरिया मुक्त अभियान’ का दावा कर रहा है, वहीं जमीनी हकीकत यह है कि संक्रमण रोकने का सबसे मुख्य हथियार मेडिकेटेड मच्छरदानी पिछले दो साल से वहां बांटी ही नहीं गई है। मानसून के साथ ही जुलाई-अगस्त से दिसंबर तक बस्तर में मलेरिया का पीक सीजन रहता है। तीन-तीन साल के रोटेशन के बावजूद हर साल किसी न किसी जिले को सप्लाई जरूर मिलती थी, लेकिन बीते दो वर्षों से यह कोटा पूरी तरह शून्य बना हुआ है। केंद्र सरकार से बजट मंजूर हुए लंबा वक्त बीत चुका है, फिर भी खरीदी की टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं की गई है। स्वास्थ्य विभाग के मलेरिया कंसल्टेंट एन. चिन्मय दास का कहना है कि इस साल सीजीएमएससी (छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेस कार्पोरेशन) के जरिए खरीदी होगी, जिसकी कागजी प्रक्रिया चल रही है।’