छत्तीसगढ़ में अब नारियां सिर्फ मतदाता नहीं, भाग्यविधाता हैं: सीएम
- विधानसभा में महिला आरक्षण पर शासकीय संकल्प पारित
- दस घंटे चर्चा, विपक्ष का बहिष्कार
रायपुर। विधानसभा में गुरूवार को लोकसभा और विधानसभा में महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण देने का शासकीय संकल्प लगभग दस घंटे की चर्चा के बाद पारित हो गया। लेकिन आसंदी द्वारा संकल्प पारित किए जाने से पहले ही विपक्ष ने यह कहते हुए सदन का बहिष्कार कर दिया कि सरकार ने इसे अच्छी नीयत से नहीं लाया है। इस दौरान इस दौरान सत्तापक्ष और विपक्ष के विधायकों के बीच तीखी बहस भी हुई।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने चर्चा का जवाब देते हुए विपक्ष पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा कि ‘डबल इंजन’ सरकार मातृशक्ति के सशक्तिकरण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। नारी शक्ति के वंदन में बाधा डालने वालों को जनता माफ नहीं करेगी। मुख्यमंत्री ने तर्क दिया कि परिसीमन से न केवल प्रतिनिधित्व बढ़ेगा, बल्कि विकास की गति भी तेज होगी क्योंकि वर्तमान में निर्वाचन क्षेत्र बहुत बड़े हो गए हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार वर्ष 2026 को ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मना रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण के क्षेत्र में ऐतिहासिक कार्य हुए हैं। उन्होंने कहा विपक्ष चाहे तो अपनी गलती सुधार सकता है और इस संकल्प को सर्वसम्मति से पास कराने में अपना योगदान दें। साय ने कहा कि यदि समय पर परिसीमन होता, तो अधिक लोगों को प्रतिनिधित्व का अवसर मिलता और लोकतंत्र और अधिक सशक्त होता।
कांग्रेस की नींव पर खड़ी है भाजपा: महंत
नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि सदन की कार्यवाही का उपयोग केवल राजनीतिक इवेंट बनाने के लिए किया जा रहा है, जिससे प्रदेश की महिलाओं को कोई तात्कालिक लाभ नहीं मिलने वाला। महंत ने कहा कि आज भाजपा जिस इमारत पर खड़ी होकर राजनीति कर रही है, उसकी नींव कांग्रेस ने ही डाली है। यदि उस नींव को खोदा जाएगा, तो उसमें कांग्रेस का ही नाम निकलेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महिलाओं को केवल दर्शक दीर्घा में बिठाकर खुश रखना चाहती है, जबकि कांग्रेस ने उन्हें वास्तविक शक्ति दी है।

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