सेंट्रल जेल सुसाइड केस,गांड़ा समाज ने की एक करोड़ मुआवजा और न्यायिक जांच की मांग
समाजजनों घटना की निंदा कर किया जेल के बाहर प्रदर्शन
रायपुर। रायपुर सेंट्रल जेल के भीतर एक विचाराधीन आरोपी ने फांसी लगा ली, जो गांड़ा जाति और अनुसूचित जाति वर्ग का है। फांसी आरोपी ने लगाई या कुछ और साजिश है, इसकी जांच करने की मांग को लेकर समाज के लोगों ने जेल परिसर के बाहर धरना देकर प्रदर्शन किया।
सामाजिक न्याय कार्यकर्ता अधिवक्ता भगवानू नायक, सामाजिक नेता किशोर महानंद, राधेश्याम विभार, आशीष तांडी, प्रीतम बघेल, भरत छुरा, चंदू बघेल, रोशनी बघेल, पिंकी निहाल ने मृतक के परिजनों को एक करोड़ रुपए का मुआवजा देने और एक सदस्य को नौकरी देने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। साथ ही मुख्यमंत्री के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंप कर उच्च न्यायालय के सेवानिवृत न्यायाधीश के माध्यम से जांच कमेटी गठित करके जांच करने की मांग की है।
ज्ञात हो कि जेल में बंद सुनील महानंद ने रविवार की रात बैरक 5 में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना की जानकारी के बाद परिजन जेल परिसर पहुंचे और जेल प्रशासन पर आरोप लगाते हुए जेल के समक्ष धरना दिया। परिजनों की शिकायत है कि जेल में सुनील महानंद को प्रताड़ना दिया गया । परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि परिजनों को सूचना दिए बगैर अंबेडकर अस्पताल स्थित मर्चुरी भेज दिया गया। टिकरापारा पुलिस ने मृतक को झूठे मामले में फंसाया। अब जेल में रहस्यमयी तरीके से मौत होना संदेह को जन्म देता है।
इस दौरान अधिवक्ता भगवानू नायक, किशोर महानंद, राधेश्याम विभार, आशीष तांडी, प्रीतम महानंद, भरत छुरा, चंदू बघेल, रोशनी बाघ, पिंकी निहाल सहित सैकड़ों की संख्या में समाज जन मौजूद थे।

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