हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: मेडिकल PG सीटों के लिए 50-50 फॉर्मूला लागू; इंस्टीट्यूशनल कोटा और ओपन कैटेगरी में बराबरी का बंटवारा
बिलासपुर। मेडिकल स्नातकोत्तर (PG) पाठ्यक्रमों में प्रवेश को लेकर चल रहे लंबे विवाद पर हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि मेडिकल पीजी सीटों का आवंटन 50-50 प्रतिशत के अनुपात में किया जाएगा। इस फैसले के तहत आधी सीटें 'इंस्टीट्यूशनल कोटा' (संस्थागत कोटा) के लिए आरक्षित होंगी, जबकि बाकी आधी सीटें 'ओपन कैटेगरी' के उम्मीदवारों के लिए उपलब्ध रहेंगी।
क्या है 50-50 फॉर्मूला?
कोर्ट के इस निर्णय के बाद अब मेडिकल कॉलेजों में पीजी सीटों का गणित पूरी तरह बदल जाएगा:
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50% संस्थागत कोटा: ये सीटें उन छात्रों के लिए होंगी जिन्होंने उसी विश्वविद्यालय या संस्थान से अपनी MBBS की पढ़ाई पूरी की है।
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50% ओपन कैटेगरी: इन सीटों पर देश भर के मेधावी छात्र मेरिट के आधार पर प्रवेश पा सकेंगे।
हाईकोर्ट के हस्तक्षेप की वजह
यह मामला तब तूल पकड़ा जब प्रवेश प्रक्रिया में सीटों के असमान वितरण और कोटे को लेकर विभिन्न याचिकाएं दायर की गईं। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि कोटे की अधिकता के कारण प्रतिभावान छात्र प्रतिस्पर्धा से बाहर हो रहे हैं। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद माना कि शैक्षणिक संस्थानों की निरंतरता और बाहरी प्रतिभाओं के अवसर के बीच संतुलन बनाना आवश्यक है।
छात्रों और संस्थानों पर प्रभाव
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स्थानीय छात्रों को लाभ: जो छात्र अपने ही संस्थान से पीजी करना चाहते हैं, उन्हें अब 50% सीटों पर प्राथमिकता मिलेगी।
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पारदर्शिता: इस स्पष्ट बंटवारे से काउंसलिंग प्रक्रिया में होने वाली भ्रम की स्थिति और कानूनी पेचीदगियां कम होंगी।
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समान अवसर: ओपन कैटेगरी के छात्रों के लिए अब पर्याप्त सीटें सुरक्षित रहेंगी, जिससे मेरिट को बढ़ावा मिलेगा।
अगले शैक्षणिक सत्र से लागू
अदालत ने संबंधित अधिकारियों और चिकित्सा शिक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि इस नए नियम को आगामी काउंसलिंग सत्र से तत्काल प्रभाव से लागू किया जाए। इस फैसले को मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़े सुधार के रूप में देखा जा रहा है।

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