ऑस्कर 2026: नॉमिनेशन से चूकी ‘होमबाउंड’, पर नीरज घेवान की कहानी ने जीता दुनिया का दिल

ऑस्कर 2026: नॉमिनेशन से चूकी ‘होमबाउंड’, पर नीरज घेवान की कहानी ने जीता दुनिया का दिल

मुंबई। करण जौहर के धर्मा प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी और नीरज घेवान द्वारा निर्देशित फिल्म होमबाउंड भले ही ऑस्कर 2026 की अंतिम रेस में जगह बनाने से चूक गई हो, लेकिन इस फिल्म ने वैश्विक स्तर पर जो प्रभाव छोड़ा है, वह किसी पुरस्कार से कम नहीं है। अंतरराष्ट्रीय फिल्म उत्सवों में फिल्म को मिली सराहना और आलोचकों की सकारात्मक प्रतिक्रिया ने भारतीय सिनेमा का मान बढ़ाया है।

संघर्ष और संवेदना की एक बेमिसाल दास्तां

‘होमबाउंड’ की कहानी कोविड-19 लॉकडाउन की उस कड़वी सच्चाई को बयां करती है, जिसे पूरे देश ने महसूस किया था। फिल्म दो युवाओं के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनके पुलिस बनने के सपने गरीबी और मजबूरी की भेंट चढ़ जाते हैं। ईशान खट्टर और विशाल जेठवा की जोड़ी ने स्क्रीन पर मजदूरी के संघर्ष और मीलों पैदल चलकर घर लौटने की जद्दोजहद को इतनी शिद्दत से निभाया कि दर्शक भावुक हो उठे।

थिएटर से नेटफ्लिक्स तक का सफर

हैरानी की बात यह है कि फिल्म को वह सफलता सिनेमाघरों में नहीं मिली, जिसकी उम्मीद की जा रही थी। लेकिन नेटफ्लिक्स (Netflix) पर रिलीज होते ही ‘होमबाउंड’ एक ‘कल्ट क्लासिक’ बनकर उभरी। सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर चली लंबी बहस और दर्शकों के प्यार ने यह साबित कर दिया कि एक अच्छी कहानी को उसकी असली पहचान मिलने में समय लग सकता है, पर वह दबती नहीं है।

क्यों खास रही ‘होमबाउंड’?

  • निर्देशन: नीरज घेवान (मसान फेम) ने एक बार फिर अपनी संवेदनशील कहानी कहने की कला से प्रभावित किया।

  • अभिनय: ईशान खट्टर और विशाल जेठवा के करियर की यह अब तक की सबसे बेहतरीन परफॉरमेंस मानी जा रही है।

  • विषय: लॉकडाउन और प्रवासी मजदूरों के मुद्दे को बिना किसी फिल्मी मसाले के पूरी ईमानदारी से दिखाया गया।

निष्कर्ष: ऑस्कर नॉमिनेशन न मिलना फैंस के लिए यकीनन निराशाजनक है, लेकिन ‘होमबाउंड’ ने यह संदेश दिया है कि सिनेमा का असली उद्देश्य सिर्फ अवॉर्ड जीतना नहीं, बल्कि समाज के उन कोनों को छूना है जिन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है।