दही या छाछ: सेहत के लिए क्या है ज्यादा बेहतर? जानें आयुर्वेद और विज्ञान की राय
नई दिल्ली। भारतीय खान-पान में दही और छाछ दोनों ही अभिन्न अंग हैं। भोजन के साथ इनका सेवन न केवल स्वाद बढ़ाता है, बल्कि पाचन तंत्र को भी मजबूती देता है। अक्सर लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि इन दोनों में से सेहत के लिए कौन सा विकल्प ज्यादा फायदेमंद है।
रिपोर्ट के अनुसार, दही और छाछ दोनों के अपने अलग-अलग गुण और फायदे हैं। यहाँ विस्तार से समझें कि आपको अपनी डाइट में किसे शामिल करना चाहिए:
1. दही के फायदे (Benefits of Curd)
दही पोषक तत्वों का भंडार है। इसमें कैल्शियम, विटामिन B-12, विटामिन B-2, मैग्नीशियम और पोटेशियम प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
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प्रोबायोटिक्स का स्रोत: दही में मौजूद 'गुड बैक्टीरिया' आंतों के स्वास्थ्य के लिए रामबाण हैं।
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हड्डियों की मजबूती: कैल्शियम की अधिकता के कारण यह हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाता है।
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वजन बढ़ाना: जो लोग वजन बढ़ाना चाहते हैं, उनके लिए दही का सेवन अधिक फायदेमंद होता है क्योंकि इसमें छाछ के मुकाबले कैलोरी और फैट ज्यादा होता है।
2. छाछ के फायदे (Benefits of Buttermilk)
छाछ को दही में पानी मिलाकर और उसे मथकर तैयार किया जाता है। आयुर्वेद में इसे 'धरती का अमृत' कहा गया है।
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पाचन में हल्का: दही के मुकाबले छाछ को पचाना बहुत आसान होता है। भारी भोजन के बाद छाछ पीना एसिडिटी और ब्लोटिंग को कम करता है।
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हाइड्रेशन: गर्मियों में छाछ शरीर को ठंडा रखने और पानी की कमी को पूरा करने का सबसे अच्छा स्रोत है।
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लो कैलोरी: जो लोग वजन घटाना चाहते हैं, उनके लिए छाछ एक बेहतरीन विकल्प है क्योंकि इसमें फैट की मात्रा बहुत कम होती है।
तुलना: कौन है किस पर भारी?
| गुण | दही | छाछ |
| पाचन | पचने में थोड़ा भारी | बहुत हल्का और सुपाच्य |
| तासीर | ठंडी (लेकिन रात में खाने से कफ बढ़ा सकता है) | अत्यंत शीतल और सुखद |
| पोषक तत्व | अधिक सघन (Concentrated) | पानी की अधिकता, कम कैलोरी |
| उपयुक्त समय | दोपहर का भोजन | दिन में कभी भी (विशेषकर भोजन के बाद) |
विशेषज्ञों की राय: किसे क्या चुनना चाहिए?
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दही चुनें: यदि आप दुबले-पतले हैं, आपको अधिक ऊर्जा की जरूरत है या आप अपनी मांसपेशियों को मजबूत करना चाहते हैं।
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छाछ चुनें: यदि आप कब्ज, गैस या एसिडिटी से परेशान हैं, या आप वेट लॉस जर्नी पर हैं।
सावधानी:
आयुर्वेद के अनुसार, दही का सेवन रात के समय करने से बचना चाहिए क्योंकि यह शरीर में कफ दोष को बढ़ा सकता है। वहीं, छाछ में भुना हुआ जीरा और काला नमक मिलाकर पीने से इसके औषधीय गुण और बढ़ जाते हैं।

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