चीन का 'मंकी बिजनेस': 25 लाख रुपये तक पहुँची एक बंदर की कीमत
बीजिंग। चीन में नए साल के मौके पर एक अनोखी और महंगी "मारामारी" देखने को मिल रही है। यह दौड़ सोने या जमीन के लिए नहीं, बल्कि प्रयोगशाला के बंदरों (Lab Monkeys) के लिए है। जो बंदर कुछ समय पहले तक कुछ हजार युआन में मिल जाते थे, उनकी कीमत अब बीजिंग और उसके आसपास के इलाकों में 25-25 लाख रुपये प्रति बंदर तक पहुँच गई है।
हैरानी की बात यह है कि इतनी ऊंची कीमतों के बावजूद चीन की सरकारी एजेंसियां और बड़ी दवा कंपनियां इन्हें खरीदने के लिए कतार में खड़ी हैं।
क्यों लगी है बंदरों की 'बोली'?
चीन की सरकार ने देश को वैश्विक मेडिकल हब बनाने के लिए "सुपर-स्पीड" रिसर्च का आह्वान किया है। इसी के तहत चीनी लैब में अभूतपूर्व स्तर पर परीक्षण हो रहे हैं:
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वैक्सीन ट्रायल: साल 2025 में एमपॉक्स (Mpox), कोरोना के नए वेरिएंट्स और कैंसर की दवाओं के लिए रिकॉर्ड संख्या में बंदरों पर परीक्षण किए गए।
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उम्र बढ़ाने का शोध (Anti-Aging): चीन में इस समय 'अमरता' या लंबी आयु को लेकर विशेष शोध चल रहा है। इंसानों जैसी शारीरिक संरचना होने के कारण बंदरों पर इन टीकों का परीक्षण अनिवार्य माना जाता है।
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अंतरिक्ष में प्रजनन: रिपोर्टों के अनुसार, चीन अपने स्पेस स्टेशन (Tiangong) में बंदरों के प्रजनन और जैविक विकास पर भी शोध कर रहा है, जिससे मांग और बढ़ गई है।
सप्लाई कम, डिमांड ज्यादा: सरकार की अपील
चीन में बंदरों की कुल संख्या में पिछले कुछ वर्षों में गिरावट आई है, जबकि शोध कार्यों में उनका उपयोग औसतन 25,000 बंदर प्रति वर्ष तक पहुँच गया है।
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घरेलू कमी: चीन ने पूर्व में बंदरों के निर्यात पर बैन लगा दिया था, लेकिन अब खुद उसके पास पर्याप्त स्टॉक नहीं बचा है।
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प्रजनन को बढ़ावा: स्थिति को देखते हुए चीनी सरकार ने आम नागरिकों और निजी केंद्रों से बंदरों के सुरक्षित प्रजनन और संरक्षण में मदद करने की अपील की है। कुछ प्रांतों में बंदरों के सफल प्रजनन के लिए भारी सब्सिडी भी दी जा रही है।
ब्लैक मार्केट और अवैध तस्करी का खतरा
कीमतों में 2000% से अधिक की बढ़ोतरी ने सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। जानकारों का कहना है कि उच्च मांग के कारण जंगली बंदरों की अवैध तस्करी और उन्हें 'पालतू' बताकर बेचने का काला कारोबार फिर से बढ़ सकता है, जिससे भविष्य में नए 'ज़ूनोटिक' (जानवरों से फैलने वाले) वायरस का खतरा पैदा हो सकता है।

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