धमतरी/रायपुर (चैनल इंडिया)। धमतरी जिले का बिरेतरा गांव इन दिनों शिक्षा और सामाजिक अनुशासन के अनोखे प्रयोग के कारण पूरे प्रदेश में चर्चा का केंद्र बन गया है। 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा (2026) से पहले गांव ने ऐसा निर्णय लिया है, जिसे ग्रामीण भविष्य बचाओ अभियान का नाम दे रहे हैं।
गांव की सामूहिक बैठक में सर्वसम्मति से तय किया गया कि शाम छह बजे के बाद कोई भी स्कूली छात्र सडक़, चौक-चौराहे, दुकान, ठेला, खेल मैदान या चौपाल पर नजर नहीं आएगा। नियम तोडऩे की स्थिति में केवल छात्र ही नहीं, बल्कि उसके अभिभावकों को भी जिम्मेदार माना जाएगा और जुर्माना लगाया जाएगा। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में युवाओं में मोबाइल की लत, देर शाम तक बाहर घूमने की आदत और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति ने पढ़ाई को प्रभावित किया है। शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल बिरेतरा में आयोजित बैठक में शिक्षकों, स्कूल प्रबंधन समिति, महिला समूहों, युवाओं और बुजुर्गों ने मिलकर चर्चा की। निष्कर्ष निकला कि यदि सामूहिक अनुशासन लागू किया जाए, तो बोर्ड परीक्षा में उल्लेखनीय सुधार संभव है।
स्थानीय लोगों के अनुसार नियम लागू होने के बाद बिरेतरा की शाम का दृश्य पूरी तरह बदल गया है। जहां पहले चौपालों और गलियों में युवाओं की भीड़ दिखती थी, अब वहां सन्नाटा नजर आता है। एक ग्रामीण महिला ने बताया कि अब बच्चे घर में बैठकर पढ़ाई करते हैं। माहौल पहले से ज्यादा शांत और सकारात्मक हो गया है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बोर्ड परीक्षा से पहले नियमित अध्ययन का समय तय करना लाभकारी होता है। गांव में वार्ड निगरानी समितियों का गठन किया गया है, जो सुबह और शाम बच्चों पर नजर रखती हैं. ग्रामीणों का कहना है कि अब कोई भी बच्चा बाहर दिखता है तो पड़ोसी भी टोक देते हैं। आसपास के लोग भी बच्चों से कहते हैं कि घर जाइए और पढ़ाई कीजिए।