"देश के 50% युवा 'बॉडी इमेज डिस्ट्रेस' के शिकार; सोशल मीडिया बन रहा मानसिक दुश्मन" : रिपोर्ट में चौकाने वाला खुलासा
नई दिल्ली। देश की राजधानी स्थित एम्स (AIIMS) और आईसीएमआर (ICMR) की एक ताज़ा रिपोर्ट ने माता-पिता और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का युवा वर्ग एक ऐसी 'खामोश बीमारी' की चपेट में है, जिसका सीधा संबंध उनके शरीर की बनावट से है।
क्या है बॉडी इमेज डिस्ट्रेस?
जब कोई व्यक्ति अपने शरीर को लेकर इतना अधिक चिंतित या शर्मिंदा महसूस करने लगे कि उसका असर उसके दैनिक जीवन, आत्मविश्वास और सामाजिक व्यवहार पर पड़ने लगे, तो इसे 'बॉडी इमेज डिस्ट्रेस' कहा जाता है।
अध्ययन के चौंकाने वाले आंकड़े:
| समस्या | प्रभाव |
| मानसिक स्वास्थ्य | डिप्रेशन और एंग्जायटी (घबराहट) के मामलों में 40% की वृद्धि। |
| सामाजिक व्यवहार | आत्मविश्वास की कमी के कारण 35% युवा भीड़भाड़ और आयोजनों से दूरी बना रहे हैं। |
| मुख्य कारण | सोशल मीडिया पर बॉडी शेमिंग और अवास्तविक ब्यूटी स्टैंडर्ड्स। |
विशेषज्ञों की चेतावनी: 'फिल्टर' की दुनिया से निकलना जरूरी
एम्स के मनोचिकित्सकों का कहना है कि युवा अक्सर यह भूल जाते हैं कि सोशल मीडिया पर दिखने वाली तस्वीरें असलियत से कोसों दूर हैं। लगातार तुलना करने से उनमें 'ईटिंग डिसऑर्डर' (कम खाना या बहुत ज्यादा खाना) जैसी समस्याएं भी पनप रही हैं।
डॉक्टरों की सलाह:
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डिजिटल डिटॉक्स: सोशल मीडिया पर बिताए जाने वाले समय को सीमित करें।
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काउंसलिंग: यदि आपका बच्चा अपने लुक्स को लेकर बहुत ज्यादा उदास रहता है, तो उसे विशेषज्ञ की सलाह दिलाएं।
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सकारात्मकता: स्कूलों में 'बॉडी पॉजिटिविटी' को लेकर वर्कशॉप आयोजित की जानी चाहिए।

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