पंचांग 22 मार्च: आज है चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन, माँ कुष्मांडा की पूजा और सूर्य उपासना का अद्भुत संयोग
नई दिल्ली : आज 22 मार्च 2026, रविवार का दिन है। हिंदू पंचांग के अनुसार, आज चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। आज देशभर में चैत्र नवरात्रि का चौथा दिन पूरी श्रद्धा के साथ मनाया जा रहा है। आज का दिन आदिस्वरूपा माँ कुष्मांडा की उपासना को समर्पित है, जिनकी मंद मुस्कान से ही ब्रह्मांड की उत्पत्ति मानी जाती है। रविवार का दिन होने के कारण आज सूर्य देव की उपासना का भी विशेष महत्व है।
पंचांग के माध्यम से जानें आज के शुभ मुहूर्त, राहुकाल और ग्रहों की स्थिति का सटीक विवरण:
आज का पंचांग: मुख्य विवरण (22 मार्च 2026)
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तिथि: चतुर्थी (शुक्ल पक्ष) - शाम 04:55 PM तक, उसके बाद पंचमी तिथि शुरू।
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दिन: रविवार (Sunday)
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मास: चैत्र (विक्रम संवत 2083)
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नक्षत्र: भरणी नक्षत्र - सुबह 09:56 AM तक, उसके बाद कृतिका नक्षत्र।
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करण: विष्टि (भद्रा) - सुबह 06:04 AM तक, उसके बाद बव और बालव।
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योग: प्रीति योग - सुबह 09:37 AM तक, उसके बाद आयुष्मान योग।
चैत्र नवरात्रि चतुर्थी: माँ कुष्मांडा पूजा
माँ कुष्मांडा को अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। इनकी पूजा से रोगों और शोकों का नाश होता है तथा आयु व यश में वृद्धि होती है।
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विशेष भोग: माँ कुष्मांडा को कुम्हड़ा (पेठा) अत्यंत प्रिय है। आज के दिन पेठे की मिठाई का भोग लगाना और दान करना विशेष फलदायी माना जाता है।
सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय
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सूर्योदय: सुबह 06:25 AM
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सूर्यास्त: शाम 06:33 PM
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चंद्रोदय: सुबह 09:17 AM
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चंद्रास्त: रात 09:14 PM
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चंद्र राशि: मेष राशि - दोपहर 03:26 PM तक, उसके बाद वृषभ राशि।
आज के शुभ मुहूर्त (Auspicious Timings)
शुभ कार्यों और विशेष अनुष्ठानों के लिए आज के श्रेष्ठ समय:
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:04 PM से 12:53 PM तक।
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विजय मुहूर्त: दोपहर 02:29 PM से 03:18 PM तक।
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अमृत काल: रात 04:51 AM (23 मार्च) से 06:22 AM तक।
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ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:47 AM से 05:36 AM तक।
अशुभ समय: राहुकाल और वर्ज्य (Inauspicious Timings)
रविवार के दिन राहुकाल के दौरान महत्वपूर्ण यात्रा या नए कार्यों की शुरुआत से बचना चाहिए:
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राहुकाल: शाम 05:02 PM से 06:33 PM तक।
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यमगण्ड: दोपहर 12:29 PM से 02:00 PM तक।
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गुलिक काल: दोपहर 03:31 PM से 05:02 PM तक।
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भद्रा: सुबह 06:04 AM तक (शुभ कार्यों में वर्जित)।
आज का विशेष महत्व और उपाय
आज सूर्य देव और माँ कुष्मांडा का दोहरा संयोग है, जो तेज और आरोग्य प्रदान करने वाला है।
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विशेष उपाय: सूर्योदय के समय तांबे के लोटे में जल, लाल फूल और अक्षत डालकर सूर्य देव को अर्घ्य दें। साथ ही माँ कुष्मांडा को लाल वस्त्र या लाल पुष्प अर्पित करें। इससे कुंडली में सूर्य मजबूत होता है और आत्मविश्वास बढ़ता है।
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दिशाशूल: रविवार को पश्चिम दिशा में यात्रा करना वर्जित माना जाता है। यदि यात्रा बहुत जरूरी हो, तो घर से दलिया या घी खाकर निकलें।

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