पार्टी नहीं, महादेव का आशीर्वाद: नए साल पर काशी में टूटा भीड़ का रिकॉर्ड, एक हफ्ते में पहुँचे 20 लाख श्रद्धालु

पार्टी नहीं, महादेव का आशीर्वाद: नए साल पर काशी में टूटा भीड़ का रिकॉर्ड, एक हफ्ते में पहुँचे 20 लाख श्रद्धालु

वाराणसी। भारत में नए साल के जश्न का अंदाज़ अब बदल रहा है। डिस्को और क्लबों के शोर-शराबे की जगह अब मंदिरों की शांति और आध्यात्मिकता ले रही है। इसका सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरी है बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी। साल 2026 के स्वागत के लिए वाराणसी में आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा है कि प्रशासन को भीड़ नियंत्रित करने के लिए अपने सबसे सख्त सुरक्षा प्रोटोकॉल को लागू करना पड़ा है।

शिव की नगरी 'हाउसफुल', टूटा दशकों का रिकॉर्ड

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले महज एक हफ्ते के भीतर 20 लाख से ज्यादा भक्तों ने बाबा विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई है। केवल बीते तीन दिनों में ही 11 लाख से अधिक लोगों ने दर्शन किए हैं। काशी के सभी होटल, गेस्ट हाउस और धर्मशालाएं हफ्तों पहले से बुक हो चुकी हैं।

विदेशी सैलानियों पर भी चढ़ा 'शिव' का रंग

सिर्फ देश के कोने-कोने से ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार से आए विदेशी पर्यटक भी गंगा आरती और बाबा के दर्शन के साथ अपने साल की शुरुआत कर रहे हैं। कई सैलानियों का कहना है कि पहाड़ों और समंदर के किनारे जश्न मनाने के बजाय, महादेव की नगरी में साल का पहला दिन बिताना उन्हें अधिक मानसिक शांति दे रहा है।

प्रशासन अलर्ट: लागू हुआ '3 लाख प्लस' एसओपी

मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) विश्व भूषण मिश्रा ने बताया कि भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और सुविधा के अभूतपूर्व इंतजाम किए गए हैं:

  • विशेष बैरिकेटिंग: कतारों को व्यवस्थित रखने के लिए 'एंड-टू-एंड' बैरिकेटिंग की गई है ताकि भगदड़ जैसी स्थिति न बने।

  • हेल्थ सपोर्ट: लंबी कतारों में खड़े श्रद्धालुओं के लिए ओआरएस (ORS), पीने का पानी और मेडिकल मोबाइल टीमें चप्पे-चप्पे पर तैनात हैं।

  • ड्रोन निगरानी: दशाश्वमेध घाट से लेकर मंदिर परिसर तक चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी और ड्रोन से नजर रखी जा रही है।

बदलता भारत: क्लब संस्कृति पर भारी पड़ी आस्था

समाजशास्त्रियों का मानना है कि काशी विश्वनाथ कॉरिडोर बनने के बाद से लोगों का रुझान धार्मिक पर्यटन की ओर तेजी से बढ़ा है। युवा पीढ़ी अब 'पार्टी कल्चर' से हटकर अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौट रही है। नए साल पर काशी की यह भीड़ इसी वैचारिक परिवर्तन का जीवंत प्रमाण है।