15 फरवरी को ही महाशिवरात्रि, व्रत का बड़ा महत्व : इंदुभवानंद महाराज

15 फरवरी को ही महाशिवरात्रि, व्रत का बड़ा महत्व : इंदुभवानंद महाराज

चतुर्दशी की रात्रि के चारों पहर में करना चाहिए भगवान शिव का रुद्राभिषेक

रायपुर। श्री शंकराचार्य आश्रम बोरियाकला रायपुर के प्रमुख दंडी स्वामी इंदुभवानंद महाराज ने महाशिवरात्रि का संशय दूर किया है। महाराज जी ने कहा कि महाशिवरात्रि को लेकर लोगों के मन के संशय को दूर किया है। उन्होंने कहा कि महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी रविवार दिनांक 15 फरवरी को ही मनाई जाएगी। चतुर्दशी तिथि दिनांक रविवार 15 फरवरी को संध्या 4:23 बजे से प्रारंभ हो रही है, जो दूसरे दिन दिनांक 16 फरवरी सोमवार को संध्या 5:10 बजे पर समाप्त होगी। अतः महाशिवरात्रि का व्रत रविवार दिनांक 15 फरवरी को ही मनाया जाएगा। 

महाराज जी ने कहा कि चतुर्दशी तिथि रविवार 15 फरवरी को रात्रि में प्राप्त हो रही है। निर्णय सिंधु के अनुसार मध्य रात्रि में जब चतुर्दशी होती है, तभी शिवरात्रि व्रत को करना चाहिए। स्पष्ट निर्देश वहां प्राप्त होता है कि मध्य रात्रि में जब चतुर्दशी प्राप्त हो जाए तभी उस दिन महाशिवरात्रि व्रत करना चाहिए। और भी प्रमाण ऐसे प्राप्त होते हैं कि फाल्गुन कृष्ण पक्ष की  चतुर्दशी तिथि की रात्रि को तामसी रात्रि के नाम से जाना जाता है। यही महाशिवरात्रि कही जाती है। जो इस तिथि को उपवास करता है भगवान भोलेनाथ उस पर अत्यंत प्रसन्न हो जाते हैं। यज्ञ से नहीं अनुष्ठान से नहीं और अन्य कर्म से नहीं प्रसन्न होते जितने चतुर्दशी के व्रत करने से प्रसन्न हो जाते हैं। महाराज जी ने कहा कि यदि आपके पास सामर्थ्य है तो चतुर्दशी की रात्रि में चारों पहर में भगवान शिव का रुद्राभिषेक करना चाहिए। प्रथम पहर में दूध से करना चाहिए। दूसरे पहर में दही से करना चाहिए। तीसरे पर में घृत से करना चाहिए।  चौथे पहर में मधु से करना चाहिए। इस प्रकार से सारी रात जागरण करके भगवान शिव का पूजन करना चाहिए।