गृस्तोदित चंद्र ग्रहण में एक दिन पूर्व भोजन वर्जित : स्वामी इंदुभवानंद

गृस्तोदित चंद्र ग्रहण में एक दिन पूर्व भोजन वर्जित : स्वामी इंदुभवानंद

ग्रहण 3 मार्च को, सूतक सुबह 6:20 से
रायपुर। श्री शंकराचार्य आश्रम बोरियाकला के प्रमुख दंडी स्वामी डॉ. इंदुभवानंद महाराज ने बताया कि फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा, मंगलवार 3 मार्च को गृस्तोदित खंडग्रास चंद्र ग्रहण लगेगा। यह ग्रहण पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में संक्रमित होगा। दोपहर 3:20 बजे से शुरू होकर शाम 6:47 बजे तक ग्रहण काल रहेगा। कुल अवधि 3 घंटे 27 मिनट की होगी।

स्वामी इंदुभवानंद के अनुसार, गृस्तोदित चंद्र ग्रहण में पर्वकाल चंद्रोदय के बाद प्रारंभ होता है। अलग-अलग शहरों में चंद्रोदय के समय के अनुसार पर्वकाल भिन्न रहेगा।

शहरवार चंद्रोदय और पर्वकाल :

वाराणसी: 5:59 बजे — 48 मिनट
इलाहाबाद (प्रयागराज): 6:05 बजे — 42 मिनट
भोपाल: 6:24 बजे — 23 मिनट
दिल्ली: 5:38 बजे — 1 घंटा 9 मिनट
हरिद्वार: 6:17 बजे — 30 मिनट
कोलकाता: 5:39 बजे — 1 घंटा 8 मिनट
लखनऊ: 6:07 बजे — 40 मिनट
मुंबई: 6:47 बजे — 2 मिनट
नागपुर: 6:18 बजे — 29 मिनट
रायपुर: 6:07 बजे — 40 मिनट

सूतक और भोजन संबंधी नियम : 
महाराज ने बताया कि चंद्र ग्रहण का सूतक 9 घंटे पूर्व प्रारंभ होता है। इस अनुसार सुबह 6:20 बजे से सूतक प्रभावी माना जाएगा। उन्होंने कहा कि गृस्तोदित चंद्र ग्रहण के कारण एक दिन पूर्व भी भोजन नहीं करना चाहिए। 3 मार्च को प्रातः 6:20 बजे के बाद भोजन वर्जित रहेगा। मोक्ष (समापन) के बाद ही भोजन करने का विधान है। बालक, वृद्ध और रोगी, आतुर व्यक्तियों के लिए 3 घंटे पूर्व तक ही दोष मान्य है, अतः वे ग्रहण से 3 घंटे पहले तक भोजन कर सकते हैं।

राशियों पर प्रभाव :
स्वामी इंदुभवानंद के अनुसार राशियों पर ग्रहण का प्रभाव इस प्रकार रहेगा—
मेष: चिंताजनक
वृष: व्यथा
मिथुन: सामान्यतः अशुभ, परंतु संपत्ति के योग
कर्क: क्षति
सिंह: घात
कन्या: हानि
तुला: लाभ
वृश्चिक: सुख
धनु: सम्मान हानि
मकर: मृत्यु तुल्य कष्ट
कुंभ: स्त्री पक्ष से पीड़ा
मीन: उत्तम फल

ग्रहण के बाद करें ये उपाय :
ग्रहण मोक्ष के बाद स्नान, दान और तिल दान करने की सलाह दी गई है। सर्प की आकृति बनाकर पात्र में रखकर तिल आदि दान करने से दोषों का शमन होता है।