संघर्ष पर खेल की जीत: सुदूर बस्तर का अबूझमाड़ रामकृष्ण मिशन आश्रम का फुटबॉल टैलेंट पाइपलाइन खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में चमका

संघर्ष पर खेल की जीत: सुदूर बस्तर का अबूझमाड़ रामकृष्ण मिशन आश्रम का फुटबॉल टैलेंट पाइपलाइन खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में चमका

संघर्ष और अलगाव वाले क्षेत्र से उभर रहे युवा फुटबॉलर; आश्रम में विभिन्न आयु वर्गों के 2,700 से अधिक बच्चे रहते हैं

रामकृष्ण मिशन अब ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग ले रहा है

रायपुर। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले के सुदूर अबूझमाड़ क्षेत्र में स्थित रामकृष्ण मिशन विवेकानंद आश्रम आज फुटबॉल प्रतिभाओं की एक सशक्त नर्सरी के रूप में उभर रहा है। वर्ष 1986 में स्थापित यह आश्रम आदिवासी समुदायों के उत्थान के उद्देश्य से कार्य कर रहा है और अब खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में इसकी प्रतिभाएं चमक बिखेर रही हैं।

वर्तमान खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में छत्तीसगढ़ की पुरुष और महिला फुटबॉल टीमों में एक दर्जन से अधिक खिलाड़ी इसी आश्रम से प्रशिक्षण प्राप्त कर राज्य का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। महिला टीम फाइनल में पहुंच चुकी है, जबकि पुरुष टीम ने भी सेमीफाइनल में जगह बना ली है।

छत्तीसगढ़ फुटबॉल संघ के सहायक महासचिव और एआईएफएफ कार्यकारी समिति के सदस्य मोहन लाल ने बताया कि दोनों टीमों में लगभग 12-13 खिलाड़ी इस अकादमी से हैं, जो आश्रम की प्रशिक्षण प्रणाली की सफलता को दर्शाता है।

कभी संघर्ष और अलगाव के लिए पहचाने जाने वाले बस्तर क्षेत्र में यह आश्रम दशकों से दूरस्थ आदिवासी गांवों के बच्चों तक शिक्षा और अवसर पहुंचा रहा है। यहां बच्चों को निःशुल्क शिक्षा के साथ-साथ खेल और संगीत में भी प्रशिक्षण दिया जाता है।

आश्रम में बच्चों को कम उम्र से ही विभिन्न खेलों से परिचित कराया जाता है और व्यवस्थित प्रशिक्षण के माध्यम से उन्हें पढ़ाई के साथ खेलों में भी करियर बनाने के लिए तैयार किया जाता है। हर वर्ष लगभग 50 से 60 छात्र राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं।

संस्थान में तीन फुटबॉल मैदान, जिसमें एक एस्ट्रो-टर्फ भी शामिल है, के साथ बैडमिंटन, टेबल टेनिस, खो-खो और मल्लखंभ के लिए आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं। यह मजबूत खेल ढांचा खिलाड़ियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

आज आश्रम में 2,700 से अधिक छात्र अध्ययनरत हैं, जिन्हें शिक्षा के साथ डॉक्टर, इंजीनियर, खिलाड़ी या शिक्षाविद बनने के अवसर मिल रहे हैं। कई पूर्व छात्र देश की प्रतिष्ठित संस्थाओं और कंपनियों में कार्यरत हैं।

रामकृष्ण मिशन फुटबॉल अकादमी को राष्ट्रीय स्तर पर तब विशेष पहचान मिली जब यह राज्य का पहला फुटबॉल क्लब बना जिसने ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन द्वारा आयोजित अंडर-17 यूथ कप और आई-लीग 2 में भाग लिया।

यह आश्रम आज इस बात का सशक्त उदाहरण बन चुका है कि खेल और शिक्षा के माध्यम से दूरस्थ और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों के बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है।