किराया बढ़ाए बिना रेलवे कर रहा कमाल: स्क्रैप से 6813 करोड़ की कमाई, नॉन-फेयर रेवेन्यू 5 साल में 168% बढ़ा
रायपुर। भारतीय रेलवे ने स्क्रैप बिक्री और गैर-किराया राजस्व (एनएफआर) के दम पर अपनी कमाई का नया मॉडल खड़ा किया है। वित्त वर्ष 2025-26 में रेलवे ने स्क्रैप बेचकर 6813.86 करोड़ रुपए की कमाई की, जो 6000 करोड़ रुपए के लक्ष्य से काफी ज्यादा है। इस अतिरिक्त आय की बदौलत रेलवे बिना यात्री किराया बढ़ाए स्टेशनों और सुविधाओं को लगातार बेहतर बना रहा है।
रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल 2024-25 में भी 6641.78 करोड़ रुपए की स्क्रैप बिक्री हुई थी, जो तय लक्ष्य से अधिक थी। स्क्रैप हटाने से डिपो, यार्ड और वर्कशॉप में जगह खाली हुई है, जिससे पुनर्चक्रण को बढ़ावा मिला और रेलवे का संचालन अधिक पर्यावरण-अनुकूल हुआ।
5 साल में 168% बढ़ा नॉन-फेयर रेवेन्यू
गैर-किराया राजस्व भी रेलवे की कमाई का मजबूत स्तंभ बनकर उभरा है। 2021-22 में करीब 290 करोड़ रुपए से बढ़कर 2025-26 में यह 777.76 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। यानी 5 साल में लगभग 168% की वृद्धि दर्ज की गई है। इस साल का लक्ष्य 720.85 करोड़ था, जिसे रेलवे पहले ही पार कर चुका है।
स्टेशनों पर बढ़ रही सुविधाएं और ब्रांडेड आउटलेट
रेलवे स्टेशनों पर अब यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिल रही हैं। देशभर में 120 प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि केंद्र शुरू किए जा चुके हैं, जबकि 22 प्रीमियम ब्रांड आउटलेट भी खोले गए हैं। इनसे यात्रियों को सस्ती दवाएं और बेहतर सेवाएं मिल रही हैं, साथ ही रेलवे की आय भी बढ़ रही है।
डिजिटल लाउंज से लेकर गेमिंग जोन तक नई पहल
गैर-किराया आय के जरिए रेलवे स्टेशन पर मल्टी-लेवल पार्किंग, डिजिटल लाउंज, मेडिकल सेंटर, ई-व्हीलचेयर, गेमिंग जोन और हेल्थ कियोस्क जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। पश्चिमी रेलवे ने कुछ स्टेशनों पर को-वर्किंग स्पेस और डिजिटल लाउंज भी शुरू किए हैं, जहां हाई-स्पीड वाई-फाई और वर्कस्टेशन जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं।
यात्रियों को मिल रहा सीधा फायदा
रेलवे का कहना है कि इन पहलों से न सिर्फ उसकी वित्तीय स्थिति मजबूत हो रही है, बल्कि यात्रियों को स्वच्छ, सुरक्षित और आधुनिक यात्रा अनुभव भी मिल रहा है—वो भी बिना टिकट किराए में बढ़ोतरी के।

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