जनगणना और परिसीमन के बाद बढ़ेंगी विधानसभा और लोकसभा की सीटें, बदलेगा छत्तीसगढ़ का राजनीतिक भूगोल

जनगणना और परिसीमन के बाद बढ़ेंगी  विधानसभा और लोकसभा की सीटें, बदलेगा छत्तीसगढ़ का राजनीतिक भूगोल

रायपुर (चैनल इंडिया)। सूबे की सियासत में आने वाले कुछ वर्ष बड़े बदलावों के गवाह बनने वाले हैं। आगामी राष्ट्रीय जनगणना और उसके बाद होने वाले परिसीमन से प्रदेश का राजनीतिक भूगोल पूरी तरह बदल जाएगा। वर्तमान में 90 सीटों वाली छत्तीसगढ़ विधानसभा का स्वरूप विस्तार पाकर 120 सीटों तक पहुंचने की प्रबल संभावना है। 

 केवल विधानसभा ही नहीं बल्कि प्रदेश की 11 लोकसभा सीटों की संख्या में भी वृद्धि होगी। इस बदलाव से न केवल क्षेत्रों की सीमाएं बदलेंगी, बल्कि कई दशकों से जमे-जमाए राजनीतिक और जातिगत समीकरण भी पूरी तरह ध्वस्त हो जाएंगे। प्रशासन ने आगामी राष्ट्रीय जनगणना को लेकर अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इस बार की जनगणना ऐतिहासिक होगी, क्योंकि यह पूरी प्रक्रिया ‘डिजिटल मॉडल’ पर आधारित होगी। डेटा जुटाने के लिए कागजी दस्तावेजों के बजाय मोबाइल एप्लिकेशन का उपयोग किया जाएगा। नागरिकों को स्वयं अपनी जानकारी आनलाइन भरने का विकल्प भी मिलेगा। वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद 2003 से छत्तीसगढ़ में विधानसभा सीटों की संख्या 90 बनी हुई है। जानकारों का मानना है कि प्रदेश में करीब 30 नई विधानसभा सीटें जुड़ सकती हैं और लोकसभा सीटों की संख्या में भी बढ़ोत्तरी होगी। महिला आरक्षण बिल के लागू होने के बाद प्रदेश की करीब 40 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हो सकती हैं। 

 आगामी परिसीमन का सबसे बड़ा प्रभाव बस्तर संभाग में देखने को मिल सकता है। वर्तमान में यहां 12 विधानसभा और दो लोकसभा (बस्तर व कांकेर) सीटें हैं। बालोद जिले के तीनों विधानसभा क्षेत्र वर्तमान में कांकेर लोकसभा में आते हैं। नए परिसीमन में बालोद जिला कांकेर लोकसभा से अलग होकर किसी अन्य क्षेत्र का हिस्सा बन सकता है। बस्तर संभाग के भीतर चार से छह नई विधानसभा सीटें बढऩे की संभावना है। इससे आदिवासियों के लिए आरक्षित और अनारक्षित सीटों के समीकरण भी बदल सकते हैं।